27. सुशील तिवारी जी के 2गो कबिता-गीत (52, 53) - माईभाखा कबितई प्रतियोगिता

1. बेरी बेरी आवे बदरा बरसे अंगनवा रामा.....

बेरी बेरी आवे बदरा बरसे अंगनवा रामा २
कि आहो रामा सावन लागेला सुहावन २
सखि रे तनी साजन आ जईते २
हरियर हरियर भईले पेडवा पतईया रामा २
खेतवा मे मन मोहे धानवा मकईया रामा २
कि आहो रामा सोहे मे लागत ना मन २
सखि रे तनी ...........
सोरहो सिंगार कईनी सभे आभरवनवा रामा २
चुङीया कलाई बाजे खनके कागानवा रामा २
कि आहो रामा रुपवा निहरी दरपन २
सखि रे तनी ..........
नदिया तालाब मिलल मिले ना सजनवा रामा २
जाई दुआरी आोरी दउरी आंगनवा रामा २
कि आहो रामा बटिया निहारे विरहन २
सखि रे तनी .........

बाची ना लाज आज कह तारी नारी २
ए मुरारी सुन २ धीरे धीरे कम होता सारी
ए मुरारी सुन.........
१एक से एक वीर खाडा दरबार मे २
 ईजत उतारे आपन अपने परिवार मे २
 केहु नाही जीती एहिजा २सभे जाई हारी २
 ए मुरारी सुन.......
२धरम धराईल ताखा आज धरमराजके २
 साप सुंघी लेले बाटे सऊसे समाज के २
 दादा के गादा खाडा२ चुप धनुरधारी २
 ए मुरारी सुन ....
३नयाय अनयाय सब देखे नाही बोले २
 निमक के नाम पर इजत के तोले २
 आव ना त टूट जाई हमनी के यारी २ 
ए मुरारी सुन........

2. त भजी ल राम चरन सुखदाई

त भजी ल राम चरन सुखदाई २
काम दाम एह जाम से निकल २
मनवा मोह हटाई २
नात नाप बटखरा चढी २
का खोई का पाई 
त भजी ल.........
रूप रंग ई अंग ना रही २
माटी मे मिली जाई २
निमन बाऊर संग मे जईहे २
ईहे बात लिखाई
त भजी ल.........
जोश म होश बेहोश ना होख २
पोस ना मानी जाई २
जनम मरन मरम माया के २
केहु जानी ना पाई
त भजी ल .............

सुशील तिवारी
आरा, बिहार

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

1. पंकज यादवजी के दुगो कबिता (1, 58) - माईभाखा कबिताई प्रतियोगिता

सुनतानी जीं - माईभाखा कबितई प्रतियोगिता घोसित हो गइल।

अब कवितई (कविता प्रतियोगिता) के भाँजा