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January, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फगुआ (होरी गीत) संग्रह पहल प्रतियोगिता - 2018

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                            भोजपुरी नगरिया, हर्फ मीडिया अउर किताब गली के प्रस्तुति फगुआ (होरी गीत) संग्रह पहल प्रतियोगिता - 2018 धेयान दीं-  रउरी सहजोग की बिना इ पहल पूरा ना हो पाई। अपनी जिला-जवार में पारंपरिक रूप से गाए-जाए वाला 1 गो भा 2 गो होरी गीत अउर साथे-साथे रउओं एगो भा दुगो सुघड़ भोजपुरी गीत लिख के भेज दीं। धेयान दीं की इ दुनु मिला के 3गो से अधिका रचना ना होखे के चाहीं।  माईभाखा में लिखीं, लिखवाईं, माई, माईभाखा के नाव बढ़ाईं। जय-जय।
http://bhojpurimanthan.com/phaguaa-holi-geet/
http://pandiji.blogspot.in/
भवदीय, माईभाखा समरिधी पहल आयोजक मंडल अउर जानकारी चाहीं त 9892448922 पर राउर सहर्ष सोवागत बा। जय-जय

धरम के कोख से जनमल स्वतंत्रता के पहिलका संग्राम - केशव मोहन (भोजपुरिया बीर-बाकुड़ा नमन पहल-प्रतियोगिता से परे)

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धरम के कोख से जनमल स्वतंत्रता के पहिलका संग्राम आज मन कुछ बेचैन बा, कुछ शांत बा। मन के कवनो कोना में तनीक उथलो-पुथल हो ता, त कवनो कगरी शांतिओ के आसन बा। देश में चारू ओर धरम के राजनीतिकरण पर सभे चर्चा में लागल बा त अपना-अपना चसमा से देख के सभे धरम के व्याख्या करत बा। लोग खातिर धरम कुण्ठा के कुण्ड बनल बा त गतिशीलता के नाम। सामाजिक संर्किणता के साक्षात करावत बा त राजनैतिक परिर्वन के ताकत बा। धरम क्रांति के चिंगारी बा त सत्ता के सुख देबे वाला साधन। धरम टीका-त्रिपुण्ड के चंदन बा त धरम करम-कर्तव्य के पोथी। धरम धीरता के धूरि बा त धृष्ठता के धुँआ। केतना लोग खातिर धरम जिनगी के सगरो सुख के साधन बा त केतना लोग खातिर अवैज्ञानिक आ अप्रमाणिक शोर-शराबा।     आज हमरो मन एह गहन आ अपरिमित विषय पर बेचैन बा। बेचैन बा कि अगर धरम ना रहीत त आज के समाज, आज के भारत कहाँ रहीत। ना गाँधी के लाठी-लँगोटी के कवनो प्रतीक रहीत ना अंबेडकर के प्रगतिशील चिंतन के प्रमाण। ना लाला लाजपत राय के लाठी मिलल रहीत ना सरदार पटेल के लौह-पुरुष के उपाधि। आजु के भारत पता ना कबले अंग्रेजन के गुलामी में सँसरी चलावत वेंडिलेटर पर सुतल भारत …

भोजपुरिया बीर-बाकुड़ा नमन पहल-प्रतियोगिता

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26 जनवरी की उपलछ में भोजपुरी नगरिया अउर टेक्नोलाजिकल एजूकेशन सोसाइटी भारतीय शहीदन के नमन करत ए पहल में रउरी जोगदान के, सहभागिता के आभारी बा। सहजोग के हाथ बढ़ाईं, लेखनी उठाईं अउर कवनो भोजपुरिया बीर के नमन करत एगो ऐतिहासिक आलेख लिख पठाईं। सादर।
इ एगो पहल बा, माईभाखा के समरिधी में जोगदान खातिर। प्रतियोगिता त बहाना बा, ए ही बहाने अपनन के, देसप्रेमियन के, सहीदन के नमन करत माईभाखा की समरिधी में हाथ बँटाना बा। जय-जय।

सादर।
पं. प्रभाकर गोपालपुरिया