माईभाखा कबितई गीत - श्री रवि कुमार गिरी (गुरुजी) द्वारा लिखल

मनवा करत बाटे हमहुं मुस्काईं।
पंo प्रभाकर के गले से लगाईं।
भोजपुरी के दिन फिरी हो, आव भिरी। 

भोजपुरी नगरिया के इहे गुहार बा।
भोजपुरी पंचायत के बढ़िया बिचार बा।
अनुरागजी के खूब भोजपुरिया अनुराग बा।
नवजागरण में कबिता सब छपाई।
भाई बहुते ईनाम कम्पुनेटो से आई।
भोजपुरी के दिन फिरी हो, आव भिरी।

जेपी द्विवेदीजी, कुलदीपजी, केसव बाबा के साथ बा।
दिवाकर मणिजी, सुनिल सिन्हाजी अउर धनंजय तिवारी के हाथ बा।
भइया नवीन कुमार,  दिलीप भाई अउर डॉ सुमन बारी।
संगे बारन एन सी एस के बाबा गिरि हो, आव भिरी।
भोजपुरी के दिन फिरी हो आव भिरी।

रउआँ सब के सहजोग से माईभाखा आईल कबितई।
भोजपुरिया आपन रचना लिखि-लिखि के पठाईं।
भोजपुरी के संगे अब रउओं खूब जगमगाईं।
हर भोजपुरिया रोजो लिख-लिख आउर पढ़वाई।
बिरोधिअन के अब करी ईति श्री हो, आव भिरी।
भोजपुरी के दिन फिरी हो आव भिरी।
अउर सुनी नं......इहो बहुते जरूरी बा--
भईआ 9 अगस्त के जंतर मंतर पर आव।
बानी सन हमनी के चलs सब के दिखाव।
अब हक हमनी के  दे दीं, कहे भोजपुरिआ। 
मोदी जी, ई त ना करे कबो जिहजुरीआ।
सनमान के लड़ाई लड़त बा भोजपुरिया।
भोजपुरी के मान्यता मिली हो, आव भिरी।
भोजपुरी के दिन फिरी हो आव भिरी।
राश बिहारी
एन.सी.एस. फिल्म्स

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