माईभाखा कहानी लेखन प्रतियोगिता-1 के परिनाम घोसित
माईभाखा कहानी लेखन प्रतियोगिता के परिनाम रउआँ सब की सोझा राखत मन बहुते प्रसन्न बा। सबसे पहिले त हम ओ रचनाकार लोगन के नमन करतानीं जे अपनी माईभाखा में लिखेला ओकरी साथे-साथे ओ सब लोगन के जे माईभाखा के कवनो न कवनो तरे समरिध कइले में लागल बा। अरे एतने ना, सही तरे देखीं त सबसे अधिका धन्यवाद के पात्र त पाठक महानुभाव लोग बा, जे समय निकाली के रचचन के पढ़ेला। आज माईभाखा भोजपुरी कवनो परिचय के मोहताज नइखे। एकर डंका देस का विदेसन में भी बज रहल बा। इ पूरा तरे बैग्यानिकता पर खरा उतरत हर जगहि आपन मिठऊ अउर सरल छाप छोड़ रहल बिया। अभोजपुरिया भी एकर होत चलि जाता लोग। दिन-दिन एकर दायरा बढ़त चलि जाता, इ समरिध होत चलि जा तिया पर हँ, इ हो बात सही बा की अपनी कुछ लोगन की चलते इ तनि उपेछित भी बिया..... एकरा अबहिन जहाँ रहे के चाहीं, उहां पहुँच नइखे पवले। खैर, माइयो भाखा के अच्छा दिन आई, भोजपुरिया लोग दिल खोलि के एकर गुनगान गाई। जय-जय। त एगो बात- सबसे पहिले त हम सातों मान्यवर कहानीकार (जे आपन कहानी भेजले रहल ह) लोगन के नमन करतानीं अउर हिरदय से आभार वेयक्त करतानीं। अगर इहाँ सब आपन कहानी ना भेजले रहतिजाँ ...

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