6. अरविंद कुमार तिवारीजी के दुगो अवधी-भोजपुरी कबिता (10,30) - माईभाखा कबितई प्रतियोगिता


1. हम इंसान हई

मत कह हिन्दू -मुसलमान हई !
गर्व करऽ वंशज हम इंसान हई !!

देहवां मे उहइ पानी खून बा !
ई भावुकता वइसइ जुनून बा !!
कपड़ा के फेर में अलगान हई!
गर्व करऽ वंशज हम इंसान हई !!

रोजीरोटी में दूनउ क गुजार बा !
जिम्मेदारी क जीवन परिवार बा !!
बोली भाषा चलन से सयान हई!
गर्व करऽ वंशज  हम इंसान हई !!

मौलवी-पंडित क आदर ज्ञान बा !
अजान-आरती क भाव समान बा!!
धरम-करम क गीता-कुरान हई !
गर्व करऽ वंशज  हम इंसान हई 

बटा भूभाग जवन धरती एक बा !
आस्था क मस्जिद-मंदिर एक बा !!
रहमत क अल्लाह-भगवान हई!
गर्व करऽ वंशज हम इंसान हई!!

राज काज मिली क चलावइ के बा !
देश क मान हमके सजावइ के बा!!
भइयप्पनई में तऽ हिन्दुस्तान हई !
गर्व करऽ वंशज  हम इंसान हई !!


2. गांव व शहरीकरण
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गांव क लागत रहा कबहू देशी हवा ,
शहरातू होइक ई सब परदेशी भवा बा !
जहाँ मन क मौज खूब बड़कवा मान रहा,
अब अपने डेहरीया क महिमान भवा बा!!

खेतन क मेड़ डाण टहरत रहेन कबहू,
सड़क गली ई चक्कर में उबाऊ भवा बा !!
अच्छा भल मनई झेलत दोख अबही तऽ ,
कमहइया कहीक जान पहीचान भवा बा !! 

धोती लुंगी पयजामा बड़प्पन कुछ रहा,
फैशन देहपर क बचा खुचा लाज भवा बा!
नैतिकता के बतियावइ मोहे लगइ केहुसे,
जे अपने कुकर्म में उलझा परेशान भवा बा !!

जवन रूख सुक्ख रहा तंदरूस्त रहा ,
पिज्जा टिज्जा मे तऽ तनवउ खराब भवा बा !
दूध दही पचावउ मे फूली क गुप्पा भ हैन,
सांझ गुजारइ में सोडा ठंडा जलपान भवा बा !!   

नदी पोखर पौड़इ में बड़ा मस्ती रहा ,
फूहारा से छिछकार कइ नहाब भवा बा !
खुला में खटियाँ पर ओंठगइ क जियरा ,
कमरन में ससकीक क मेहरबान भवा बा !!

बड़न बुजुर्गन क पैलगी प्रणाम रहा ,
हाय हलो से इहा बाकी व्यवहार भवा बा !
सयान छोट बड़ क लिहाज के करइ ,
फूहड़ता चलन निर्लज्ज मुस्कान भवा बा !!

न रहीग ठेठ न गंवइ बोल चाल केहूमें ,
डर क मारा आदर्शइ में अनजान भवा बा!
ई देखावटी पन में का बताई आपन अदतिउ,
शहरीकरण में बिगड़ी क बेइमान भवा बा !!



धन्यवाद,आभार

अरविंद कुमार तिवारी
गांव+पोस्ट -बामपुर
जिला -इलाहाबाद
माण्डारोड 
उत्तर प्रदेश -212104

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