22. आदित्य प्रकाश अनोखा जी के दुगो कबिता (41, 42) - माईभाखा कबितई प्रतियोगिता

1. ई जे बिहार ह

ई जे बिहार ह
बौद्ध के विहार ह
महावीर के प्यार ह
गुरु गोविंद के दुलार ह
ई जे बिहार ह।

सिता के जनम स्थान ह
चाणक्य के सम्मान ह
असोक के प्राण ह
नालन्दा के ज्ञान ह
मेगास्थनीज,व्हेन सांग,
आइल इंहा फाहियान ह
ई जे बिहार ह।

कुंअर के तलवार ह
जेपी के ललकार ह
गांधी के हुंकार ह
राष्ट्रपति के दुआर ह
ई जे बिहार ह।

महेन्दर मिसिर के गान ह
पुरबिया पहचान ह
भिखारी ठाकुर के रचना ह
बिदेसिया के संरचना ह
विद्यापति के भाषा ह
लोकभाषा में आसा ह
ई जे बिहार ह।

आर्यभट्ट ह, रामानुजन ह
गणित के रास्ता बहुते सुगम ह
मेहनत कस, मेधावी के होड़ ह
आईएएस-आईपीएस, डॉक्टर-इंजीनियर
से खूब भइल सिंगार ह
इहे आपन बिहार ह।।


2. हम बुझिले

हम देखिले
हम सुनीले
हम बुझिले
हम समझिले,
आपन गउँआ, आपन नगरिया
लोगवा काहे छोड़$ता,
सहर से नाता जोड़त जोड़त
अंगना काहे भोर$ता।


हम सहिले
हम भोगीले
हम जीहिले
हम मरीले,
समय बेचके पइसा खातिर्
घर छोड़के रोये खातिर
सारी उमरिया सहर में जागीके
गऊंआ में एक दिन सुते खातिर।


हम पाइले
हम खोईले
हम हंसीले
हम रोइले
हाँथ में दू चार ढेबुआ लेके
डेरा पंहुची-ला हम जब,
सहर के छत निहारत निहारत
इयाद अंगना के आवे जब

हम चलीले
हम दउड़िले
हम भागिले
हम रुकीले
गरमी, जाड़ा आउर बरसात
भीड़ बढ़ावत लोगन के साथ
सहर के GDP बढ़ावे खातीर
पाथर तुर$ता एगो आउर हाथ।


आदित्य प्रकाश अनोखा
बसंत, छपरा बिहार।

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