20. चंद्रशेखर प्रसाद जी के दुगो कबिता (37, 38) - माईभाखा कबितई प्रतियोगिता

1. लागत बा दहेज अब........

दुलहिन बनि के अइनी पापा,
रहि बिरहिन बनि के माई,
लागताs दहेज अब हमरा के खाई,
लागताs दहेज अब हमरा के खाई,
चार दिन से भुखाइल भइया,पानी बिना हूटकी,
पापी कसाइयन से बचाव चाचा कर कुछ चटकी,
ससुई के चाल हमरा लागता भयावन,
एकहगो बात के दे तिया धिरावन,
कहियो ना कहियो देख लागता हमके जराई,
लागता दहेज अब हमरा के खाई,
लागता दहेज अब हमरा के खाई,
ससुरा छीन लेले बा सब गहना गुरिया,
हर बतिये में देवरा ताने गरदन पर छुरिया,
जब मन करे ननदी झोटा ध के मारे,
‌बचा ल हो बाबा बानी मउगत के दुआरे,
जनम के साथी बलमुआ बनल बा कसाई,
लगता दहेज अब हमरा के खाइ,
लागता दहेज अब हमरा के खाई,
दुलहिन बन के अइनी पापा,
रहि बिरहिन बनि के माई,
लागत बा दहेज अब हमरा के खाई,
लागत दहेज अब हमरा के खाई,


 2. रऊरा बानी परदेस पिया.....

      
राऊरा बानी परदेस पिया
            ऐइजा चांद निकलल बा,
कहिया से मुरझाईल चेहरा,
            आज हमार खिलल बा,
राऊरा बानी परदेस पिया,,,,,,
आज हमहू सजल बानी,सगरी सोलहो सिंगार में,
रतिया हमार बीते तमाम रउरे इंतज़ार में,
हमहू अकेला,चाँद अकेला,रउवो अकेला बानी जी,
राऊरा बिरह में बानी पागल, बात सांचे  जानी जी,
राऊरा बानी परदेस पिया,,,,,
सगरी हमार तीज त्योहार बीते ऐईजा अकेले,
सेजिया पड़ल बा सुना,सुना के हमरा से खेले,
दिल के दरद दिल मे राखिले,केहु से ना कहिले,
आठो पहरिया दिन रात राऊरा बाट के जोहिले,
राऊरा बानी परदेस पिया,......,
साझीये से जागल जागल भोर तक ले जगिले,
राऊरा सजनवा रही सलामत रब से दुआ ई, मांगी ले,
राऊरा बिरह में हम मर जाइब करि ना अइसन भूल जी,
कहिया खिली अँगना में अपना प्रीत के आपन फूल जी,
राऊरा बानी परदेस पिया.........
राऊरा बानी परदेस पिया,
            ऐइजा चांद निकलल बा,
कहिया से मुरझाईल चेहरा,
            आज हमार खिलल बा,
राऊरा बानी परदेस पिया.....

चंद्रशेखर प्रसाद C.K.P.
श्रीकरपुर, सिवान
Mo:-9199286889
जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया

टिप्पणियाँ

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  2. चन्द्रशेखर जी के कविता मनमोहक बाटे ।पढ़ के बड़ा सुंदर लाग।
    -दिनकर शर्मा
    +2 हिंदी शिक्षक

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  3. Jabardast .mind blowing poem. Koi jawab Nahi apka amazing
    .Arun yaduvanshi.

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  4. Jabardast .mind blowing poem. Koi jawab Nahi apka amazing
    .Arun yaduvanshi.

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  5. Jabardast .mind blowing poem. Koi jawab Nahi apka amazing
    .Arun yaduvanshi.

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