10. विनोद गिरी जी के दुगो कबिता (15, 22) - माईभाखा कविता प्रतियोगिता

1. बचपन
जाके खरिहनवा मे गुल्ली डंडा के खेलाई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

गोली गुच्ची चिका कबड्डी लडल लडाई
एन्ने ओन्ने खेलल  घरे बाबूजी के डटाई
अपने मे लडिके फिर होखे मिताई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

ना कवनो भेदभाव जाति पाति के भरम
सब मील रहीसन ना जानत रहीस धरम
ना कवनो इरसा ना कवनो छल कपटाई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

ना कवनो चिन्ता नाहि कवनो फिकर
समै से जवन मिले नीमक रोटी टीकर
गरमी के दिनमे खूबे नदी मे नहाई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

माटी के घर माटिके जांता बनावल जा
लेके धुरा जाता मे आटा पिसावल जा
झहर झहर दोल्हा पाती खेलिया खेलाई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

केहू के बोए रहिला त केहु गजरवा
केहु के मूराई त केहु बोवे मटरवा
केहु ना ले बात दिलपर होखे चुराई
बचपनवां के दिन ना भुलाई ए भाई

2. पर्यावरन 
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काहे लेत बाड भाई पेडवन के जान हो
बोल क ईसे बनिहे तोहार जिन्गी महान हो

काटी २ के पेड फैशन मे तु लगावेल
आवै वाला समैया मे जहर मीलावेल
ईहे करे मे सोचेल बाटे शान हो .बोल...

बेड आलमारी चौखट सोफा तु बनावेल
एकहु ना पवधा भ ईया खुद तु लगावेल
मति काटना होई भारी नोकसान हो,बोल...

एगो पेड कटब त दसगो पवधा लगाव
अपने भी जाग दसगो लोग के जगाव
नाहि त सुन पडि आफत मे परान हो.बोल...

पेडवा से बचे केतना लोगवा के जनवा
देवे फल फुल छाव गुन जानेला जहनवा
काहे करेल नादानी तु नादान हो  .बोल...

करतबाट खेल प्रकिरती जी के संघवा
करिहे प्रकिर्ती खेला तब ज ईब कहवां
बगिया के जनि बनाव मैदान हो .बोल...

आरा चलवाई के जुटावत बाट धनवा
फैलल परदुसण ए भाई तोहरे करनवा
तुहि कारन बाण गिरी करे बखान हो.

         विनोद गिरी

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